अब्राहम लिंकन के जीवन से मिलती सिख….

अब्राहम लिंकन की जिन्होंने अपने जीवन में काफी तकलीफों जैसे की अपना खुदका घर न होना, पिता से पढ़ने में योग्य सहायता न मिलना, अपनी माता और जिसे वे खुद बहोत प्यार कर्राते थे ऐसी प्रेमिका को खो देना, नौकरी गवाने की वजह से पैसे की किल्लत का सामना करना, वकालत में भी असफल होना, अपने तिन बच्चो की मृत्य को देखना और बार बार election में हार का सामना करना|इसके बावजूद वे हारे नहीं और हर बार वे लड़े और अंत में वे अमेरिका के 16 वे और सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति बने|

हार मनो नहीं तो कोशिश बेकार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती


आज के इस लेख में हम उपरोक्त बताई गयी पंक्तिया जिन पर 100% फिट होती है वेसे अमेरिका के 16वे प्रेसिडेंट अब्राहम लिंकन(Abraham Lincoln) पर बात करेंगे| साथ ही उन्होंने अपने जीवन में जितना संघर्ष किया शायद ही कोई उतना संघर्ष कर सके|वह कैसे वह प्रेसिडेंट के पद तक पहुंचे उस पर भी विस्तार से आपको बताएँगे जिसे आपको Motivation मिले और आप भी अपने कार्य में सफल हो सके|

अब्राहम लिंकन(Abraham Lincoln) अमेरिका के अभी तक के अमेरिका सबसे लोकप्रिय प्रेसिडेंट है| लिंकन ने अपने राष्ट्रपति के कार्यकाल के समय के दौरान दास प्रथा को सिर्फ अमेरिका ही नहीं पर पुरे विश्व में जड़ से नाबूद करने के लिए बहोत ही अच्छे प्रयास किये |

अब्राहम लिंकन की struggle (struggle of Abraham Lincoln’s life)

अब्राहम लिंकन (Abraham Lincoln) का जन्म 12 February 1809 के दिन Kentucky राज्य में Hardin County में सुबह के 7:45 को हुआ था| उनके पिता का नाम थॉमस लिंकन(Thomas Lincoln) और उनकी माता का नाम नैंसी लिंकन(Nancy Lincoln) था| उनके पिता की आर्थिक स्थिति उतनी ख़राब थी की उनको अपने घर के लिए भी दर दर ठोकर खानी पड़ी थी| थॉमस लिंकन के पास इतने भी पैसे नहीं थे की वे अब्राहम को पढ़ा सके| लोगो से मांगी हुई किताब से अब्राहम लिंकन ने पढाई की| अपना पेट पालने के लिए अब्राहम को अपनी छोटी उम्र में ही मजदूरी का सहारा लेना पड़ा था| अब्राहम लिंकन जब 9 साल के हुए तब उनके जीवन में ऐक बड़ी दुखदायी घटना हुई और उनकी माँ का देहांत हुआ|

अब्राहम के जन्म के दो साल बाद ही उनके पिता को जमींन विवाद की वजह से अपना लकड़ी से बना हुआ घर छोड़ना पड़ा था|और बाद वह दूसरी जगह पर जहा स्थायी हुए वाही पर भी जमींन विवाद के कारण घर को छोड़ना पड़ा था| 9 साल की उम्र में माँ का मृत्यु होने से घर को चलाने की जिम्मेदारी उनकी बद्दी बहन सारह जो की 11 साल की थी उन पर आ गयी| पैसो की तंगी की वजह से उनको अपनी पढाई छोड़नी पड़ी और मजदूरी शुरू करनी पड़ी| वे जिनसे शादी करना चाहते थे वे उनकी Girlfriend की भी मृत्यु हो गयी|

माँ के देहांत के बाद उनके पिता ने दूसरी शादी की और उनकी माँ ने उन्ही बहोत ही प्यार दिया और माँ की कमी को महसूस नहीं होने दिया| अब्राहम ने पडोश के गाँव में एक रिटायर्ड जज रहते थे उनके यह घरका काम कर बदले में लॉ की किताब लेकर उन्होंने लॉ की पढाई की| कुछ समय के बाद उनकी गाव के पोस्ट में नौकरी लग गयी और उस वजह से उनको काफी लोग पहचानने लगे थे|

काफी लोगो से पहचान होने के बाद उन्होंने लोगो की दास प्रथा की समस्या को महसूस किया और उन्होंने दास प्रथा के विरोध का ख्याल आया और वही से उन्होंने राजनिति में जुड़ने का विचार किया| शुरुआती समय में अब्राहम लिंकन को राजनीति में बहोत बड़ी हार का सामना करना पड़ा था, साथी उनकी नौकरी भी छुट गयी थी इसलिए पैसे की किल्लत का भी सामना करना पड़ रहा था|

धीमे धीमे सारी परिस्थिति उनके खिलाफ हो गयी और 24 साल की उम्र में उनकी girl फ्रेंड जिससे वे बहोत ही महोब्बत करते थे उनकी गंभीर बिमारी के कारण मृत्य हो गयी| Girlfriend के मृत्य के बाद वे अन्दर से काफी टूट गए थे और घंटो तक वह अपनी girl फ्रेंड की कब्र के सामने बेठे रहते थे|अब्राहम के मित्र ने उनकी काफी मदद की और उनको डिप्रेशन से बहार निकला और वे फिर से विधायक का चुनाव लड़े और इस बार वे जीते भी| वे सबसे युवा विधायक बने|

वे गरीब का केस court में लड़ने के लिए पैसे नहीं लेते थे उसकी वजह से उनके साथी वकील स्टुअर्ट ने उनका साथ छोड़ दिया था और वकालत में वे असफल हुए थे| मैरी नामक लड़की से शादी करने के बाद उनको चार बच्चे हुए लेकिन उनमे से मात्र एक ही लड़का बचा और तीन की मृत्यु हो गयी थी|

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16th president of america “Abraham Lincoln”

1860 में अब्राहम लिंकन यूनाइटेड स्टेट ऑफ़ अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लड़े और वे अमेरिका के 16 वे राष्ट्रपति बने| ये उनके जीवन की सबसे बड़ी सफलता थी| राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने अमेरिका को गृहयुद्ध से बहार निकाला और संविधान में सुधार कर दासत्व प्रथा को जड़ से निकाला| 1865 में वह एक थिएटर में नाटक देखने के लिए गए थे और वहा के एक्टर ने उन्को गोली मार कर उनकी हत्या कर दी थी|

तो यह कहानी थी अब्राहम लिंकन की जिन्होंने अपने जीवन में काफी तकलीफों जैसे की अपना खुदका घर न होना, पिता से पढ़ने में योग्य सहायता न मिलना, अपनी माता और जिसे वे खुद बहोत प्यार कर्राते थे ऐसी प्रेमिका को खो देना, नौकरी गवाने की वजह से पैसे की किल्लत का सामना करना, वकालत में भी असफल होना, अपने तिन बच्चो की मृत्य को देखना और बार बार election में हार का सामना करना|इसके बावजूद वे हारे नहीं और हर बार वे लड़े और अंत में वे अमेरिका के 16 वे और सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति बने| आज भी उनका पुराना घर और जमीन एक Heritage के रूप में संभाल कर रखा गया है|

इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है की किसी भी पारिस्थि जीवन में आये, हमें हार नहीं माननी चाहिए और उसके सामने लड़ कर उस पर अपना विजय पताका लहराना चाहिए जो की अब्राहम लिंकन ने अपने जीवन में अच्छी तरीके से किया है| इसी वजह से यह पंक्ति उनको काफी अच्छी तरह से बयान कराती है

हार मनो नहीं तो कोशिश बेकार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

हमें आशा है की आपको हमारा यह लेख पसंद आया होंगा और आप इस सत्य कहानी से प्रेरित हुए होंगे| अगर आपको हमारी यह कहानी पसंद आई हो तो इसे अद्धिक से अधिक लोगो के साथ शेयर करे | धन्यवाद|

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3 Comments

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