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Biography of Alan Turing in Hindi | एलन टूरिंग की कहानी

Alan turing का जन्म 23 june, 1912 में maida,vale, london में हुआ था| Alan turing के पिता का नाम Julius Mathison Turing था और माता का नाम Ethel sara turing था| उनके पिता ने भारत में ICS (indian civil service) में नौकरी की थी और उनकी पोस्टिंग छत्तरपुर में थी जो की उस वक्त की सबसे ऊँची पोस्ट मानी जाती थी| उनके दादाजी Britain की Bangal army में General थे|

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Alan turing biography

हेल्लो फ्रेंड्स आज के इस Be inspired के लेख में हम आपको Alan turing के बारे में बताएँगे| Alan Turing को आधुनिक कंप्यूटर और Artificial Intelligence के पिता कहे जा रहे है| इस लेख के माध्यम से हम उनको जानने का प्रयास करेंगे की वे अपने कार्य में किस तरह से वो अलग सोचते थे, उनके जीवन में किस तरह के उतर चढाव आये और world war two में उन्होंने कैसे Britain की मदद की| हमें आशा है की आपको हमारा यह लेख पसंद आएगा|

Alan Turing की Birth Detail और फॅमिली Back Ground

23 june, 1912 को Alan Turing का जन्म, maida,vale, london में हुआ था| Alan turing के पिता का नाम Julius Mathison Turing था और माता का नाम Ethel sara turing था| उनके पिता ने भारत में ICS (indian civil service) में नौकरी की थी और उनकी पोस्टिंग छत्तरपुर में थी जो की उस वक्त की सबसे ऊँची पोस्ट मानी जाती थी| उनके दादाजी Britain की Bangal army में General थे|

Alan turing का शुरुआती जीवन और अभ्यास

छे साल की उम्र के होने के बाद Alan Turing को उनके पिताजी ने उन्हें St. michael day school में पढ़ने के लिए दाखिल करा दिया| Alan turing के पिता और दादा दोनों ने भारत में नौकरी की होने के बावजूद भी Alan turing कभी भी India नहीं आये थे| Alan बचपन से ही काफी होशियार थे और उनका favroit subject mathamatics था| वो बचपन से ही यही सोचते थे की एक ऐसी मशीन बनायीं जाए जो मनुष्य की सारी प्रॉब्लम को सोल्व कर दे|

Alan turing ने 1922 से 1926 के बिच अपनी पढाई Hazelhurst preparatory school से की| 13 वर्ष के होने के बाद वह पढ़ने के लिए sherborn boarding independent स्कूल में गए| वो बचपन से ही mathamatics में काफी genius होने के बावजूद उनकी कुछ ख़राब आदतों की वजह से उनको bullying को भी फेस करना पड़ा था| ओवरआल देखे तो उनका शुरूआती अभ्यास काफी अच्छा रहा था|

Motivational story of Alan Turing- Biography  in hindi
Motivational story of Alan Turing

उन्होंने अपनी आगे की पढाई Under Graduation के लिए 1931 से लेकर 1934 तक उन्होंने sherborn में ही king’s college में अभ्यास किया और वही से उन्होंने अपना Under Graduation complete किया| अंडर ग्रेजुएशन के दौरान उनको कई सारे मैडल और अवार्ड से नवाजा गया और First class honour in mathamatics भी उनको मिला|

Alan turing के जीवन की कुछ महत्वपूर्ण घटनाए|

Alan turing पहले इंसान होंगे जिन्होंने यह कहा होंगा की मशीन की मदद से हम इंसान का काम आसान कर सकते है| उन्होंने अपनी कई साल की महेनत के बाद अपना पहला research paper बहार निकाला जिसे लोगो का काफी अच्छा प्रतिभाव मिला और लोगो ने उनकी प्रसंशा भी की| उनका पहला research paper 1936 में आया था जिसका नाम ” on computable number with an application to the Entscheidungsproblem” था|

एलन टूरिंग ने अपना पहला paper रिलीज़ करने के बाद 1936 से लेकर उन्होंने 1938 तक अपना अधिकतर समय वांचन ,लेखन और research में पसार किया| उस दौरान उन्होंने cryptology का भी अभ्यास किया और उन्होंने Electro-mechanical binary multiplier का भी आविष्कार किया|

वो Mathamatics को इस हद तक पसंद करते थे की वे किसी भी घटना को Mathamatics के साथ ही जोड़ कर देखेते थे| उन्होंने Biology में भी Mathamatics का प्रयोग किया| उन्होंने यह प्रूव भी किया की Biology में भी मैथ्स की महत्व की भूमिका है और mathamatics की मदद से हम भविष्य में गंभीर से गंभीर रोगों का इलाज भी कर सकेंगे|1938 में ही उन्होंने अपनी mathamatics की PHD princerton university में से की|

World war two में Alan turing की भूमिका

1939 में दूसरा विश्व युद्ध शुरू हो गया था और Germany ने अपनी आधुनिक Technology और आधुनिक war machinary के कारण अधिकतर यूरोप के देशो को हरा दिया था और Britain एक ऐसा देश था जो थोड़ी थोड़ी टक्कर Germany को दे रहा था| द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान Germany अपनी अत्याधुनिक मशीन ENIGMA के द्वारा अपने साथी देशो को संदेशा भेजता था| ENIGMA मशीन जो की कई बड़े बड़े Rotter और Plugin से बना हुआ था|उससे जो भी संदेशा भेजा जाता था वो एन्क्रिप्ट होता था और उसे Decrypt करना काफी मुश्किल था|

Britain की सरकार को अपनी हार दिख रही थी लेकिन अगर वे ENIGMA मशीन से भेजे जाने वाले गुप्त Message को अगर Decrypt करने में सफल हो जाए तो युद्ध में जितने की संभावना बन सकती थी | British सरकार ने उस समय Alan turing को मदद के लिए बुलाया और उनको सारी परिस्थिति से वाकेफ भी कराया| Alan turing ने अपनी खुद की team के साथ कुछ chess player और कुछ puzzel game के सौकीन लोगो को जोड़ा और नयी टीम बनायीं| लेकिन Alan turing और उनकी टीम को उसमे सफलता नहीं मिली क्योंकि ENIGMA मशीन हर घंटे अपनी pattern को बदल देता था|इस वजह से एलन और उनकी टीम ने जो “BOMBE” मशीन बनायीं उसमे उनको निष्फलता हांसिल हुई|

TURINGERY

पहले प्रयास में निष्फलता मिलने के बाद उन्होंने TURINGERY का प्रयोग किया|इसमे वे Germany जो भी मेसेज भेजता था उनमे से common word को अलग कर उससे मतलब निकालने का प्रयास करते थे| जैसे की हर मेसेज में Hail Hitler, Howz the weather जैसे word होते थे और उनके क्या अर्थ होता था उसकी भी तलाश की| बाद में इसी word से उन्होंने Germany के कई सीक्रेट मेसेज को Decode किया और अंत में British सरकार के आगे Germany को जुकना पड़ा |

Alan turing का द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का जीवन

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1945 से 1947 तक वे Hampton london में रहे और उन्होंने ACE(Automatic Computing Engine) पर National Physical Laboratory में कार्य किया| 1948 में उन्होंने अपने पुराने मित्र के साथ कंप्यूटर के लिए चेस प्रोग्राम (chess program) पर काम किया,क्योंकि उस वक्त तक chess के लिए कोई program नहीं बना था|
अपने जीवन के 39वे वर्ष में वह Biology की और बढे और उनका वहा भी योगदान काफी महत्वपूर्ण रहा| 1952 में उन्होंने आर Research Paper Release किया जिसका नाम था “The Chemical Basis of Morphogenesis”| इसमे उन्होंने Biological Organ में shape और pattern का Development कैसे होता है और उसे Mathematics के साथ कैसे देख सकते है वो भी दर्शाया था|

बाद में उनहोने जीवन में काफी तकलीफों का सामना किया जिसमे से एक बार उनको 100 दिन के लिए जेल में जाना भी पड़ा था| Alan turing पर LGBTQ के तहत आरोप लगे थे और उस वक्त उसे गुनाह समजा जाता था| सरकार के द्वारा उनमे कुत्रिम Hormones भी डाले गए थे और बाद में फिर सरकार ने उनसे माफ़ी भी मांगी थी|

अब्राहम लिंकन के बारे में पढ़े

Alan turing’s Death

Alan turing के मृत्यु के सन्दर्भ में काफी मतभेद है| कोई इसे आत्म हत्या तो कोई इसे खून बता रहा है| उनकी मृत्यु 8 जून 1954 के दिन हुई थी और उनकी लाश के पास से सेब मिला था जिस पर Cyanide मिला था| तब उनकी उम्र सिर्फ 41 साल थी| उनके मृत्यु के समय उउनकी पत्नी के साथ भी उनके सम्बन्ध अच्छे नहीं थे|

हमें आशा है की आपको हमारा यह आर्टिकल Biography of Alan Turing पसंद आया होंगा और आपको इससे आपको कुछ अच्छा कर दिखाने की प्रेरणा मिली होंगी| आज हमें और आपको Alan Turing का शुक्रियादा करना चाहिए क्योंकि उनकी वजह से हम आप तक यह कहानी शेयर कर सके और आप पढ़ सके| धन्यवाद|

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