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Short Biography of Sukhdev [Hindi]

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sukhdev thapar krantikaari

हमारे में से बहोत से लोग सुखदेव थापर को जानते होंगे लेकिन कुछ कम ही लोग होंगे जिन्होंने Biography of Sukhdev पढ़ी होंगी| आज के इस लेख के माध्यम से हम आपके लिए लेकर आये है Biography of Sukhdev Thapar जिसे आप उनके मन में देश के प्रति क्या भावना थी वह समज सके|

सुखदेव थापर(Sukhdev Thapar)-एक महान क्रांतिकारी

Biography of Sukhdev

सुखदेव थापर(Sukhdev Thapar) का जन्म लुधिआना के पंजाब में 15 मई 1907 को रामलाल थापर के यहाँ हुआ था|
उनके पिताका नाम रामलाल थापर और माता का नाम राल्ली देवी था| बचपन में ही उनले पिता की मृत्यु होने के बाद उनकी देख रेख उनके काका लाला अचिन्त्रम के द्वारा की गयी थी|

बचपन से ही सुखदेव ने अपने काफी तकलीफे देखी थी उसमे भारत के लोगो पर ब्रिटिश के द्वारा काफी तकलीफे दी जाती थी| ये सभी तकलीफों की वजह से ही उन्होंने भारत में होने वाली क्रांतिकारी गतिविधि को ज्वाइन करने का निर्णय लिया| और उन्होंने भी भारत को आजाद करने की क्रांतिकारी गतिविधि में हिस्सा लिया भी|

सुखदेव ने क्रांतिकारी गतिविधि क्यों ज्वाइन की

सुखदेव जब बारह साल की उम्र के थे तब भारत में एक दिलदहलाने वाली घटना बनी थी| 13 अप्रैल 1919 के दिन जलियावाला बाग़काण्ड हुआ और उससे पुरे देश में अशांति का माहौल उत्पन हुआ लेकिन इस बात की सबसे गहरी असर तिन लोगो पर अधिक हुई थी वो थे भगतसिंह, सुखदेव, और राजगुरु|

इस घटना के बाद गांधीजी के द्वारा असहयोग के आन्दोलन की शुरुआत की जिससे सुखदेव और भगतसिंह काफी प्रभावित हुए और उन्होंने गांधीजी की इस क्रांतिकारी मूवमेंट में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया|

सुखदेव गांधीजी से क्यूँ अलग हुए

सुखदेव और भगतसिंह ने भारत की आजादी की इस मूवमेंट में गांधीजी का सहयोग किया लेकिन चौरी चौरा की घटना से गांधीजी काफी प्रभावित हुए और उन्होंने असहयोग के आन्दोलन को वापिस ले लिया | गांधीजी की इस बात से सुखदेव और भगतसिंह काफी नाराज हुए|

सुखदेव और भगतसिंह के बीच में मित्रता(Friendship Between Sukhdev and Bhagatsinh)

सुखदेव ने अपनी पढाई लाहौर नेशनल कॉलेज से पूरी की थी और वही से वह लाला लाजपतराय के संपर्क में आये और उनके साथ वह क्रांतिकारी प्रवृति में जुड़े| सुखदेव(Sukhdev Thapar) को भगत सिंह शुरुआत में बहोत पसंद नहीं करते थे क्योंकि भगतसिंह के पास नॉलेज काफी था और वह इंग्लिश का प्रयोग अधिक करते थे| लेकिन जब सुखदेव को भगत सिंह की विचारधारा और उनके विचार के बारे में पता चला तब से वह उनसे प्रभावित हुए और बाद में सुखदेव और भगत सिंह के बिच में काफी अच्छी मित्रता हुई थी|

हिंदुस्तान सोशल रिपब्लिक असोसिएशन(HSRA)

प्रोफेसर जयचंद विद्यालंकार के कहने पर सुखदेव और भगत सिंह ने हिंदुस्तान सोशल रिपब्लिक असोसिएशन को ज्वाइन किया| बाद में उन्होंने नौजवान भारत सभा को बनाया और सुखदेव और भगतसिंह ने साथ मिलकर अंतिम समय तक काम किया| सुखदेव स्वाभाव से मस्तमौला टाइप के थे|

साइमन कमीशन की एंट्री(Simon Commission)

साइमन कमीशन में सभी सात सदस्यों में से एक भी भारत का नहीं था| जिसकी वजह से साइमन कमीशन का काफी विरोध हुआ| विरोध में लाला लाजपत राय जो की उस समय के कई क्रांतिकारी के आइडियल माने जाते थे जिन्होंने कई कॉलेज और आर्गेनाइजेशन की स्थापना की थी| उनकी लाठी से पिट कर ब्रितिशारो ने हत्या कर दी| लाला लाजपत राय से काफी लोग प्रभावित थे जिसमे भगत सिंह और सुखदेव भी शामिल थे|

लाहौर कांस्पीरेसी केस(Lahore Conspiracy)

लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लेने के लिए सुखदेव ने ही भगत सिंह की नियुक्ति की थी क्योंकि वह जानते थे की भगत सिंह अपने ध्येय के प्रति काफी केन्द्रित रहते थे | स्कॉट को मारने का पूरा प्लान किया गया लेकिन सुखदेव(Sukhdev Thapar) और भगतसिंह ने गलती से स्कॉट की जगह पर सोंडर्ष की हत्या कर दी|

हत्या करने के बाद वह लाहौर से भागने में सफल हुए और उन्होंने लाहोरे से भागने के लिए अंग्रेजो का ही रूप लिया था| कुछ दिनों बाद सुखदेव के कहने के बाद बटुकेश्वर दत्त और भगत सिंह ने लाहोर की परिषद् में बम फेंका और उन्हें वहा पर गिरफ्तार कर लिया गया| बाद में उनपर लाहौर कांस्पीरेसी का केस चलाया गया जिसमे सुखदेव की गिरफ्तारी भी की गयी|

भगतसिंह ने 116 दिन की भूख हड़ताल की और जेल की सुविधा में काफी बदलाव भी किये| उस दौरान जवाहरलाल नेहरू भी भगतसिंह से मिले थे|

शहीद(Shaheed Din)

23 मार्च 1931 के दिन गवर्नमेंट पर युवाओं का काफी प्रेशर होने के बावजूद सुखदेव भगत सिंह और राजगुरु को फांसी देनेका निर्णय लिया गया| जब सुखदेव(Sukhdev Thapar) को फांसी पर लटकाया गया तब उनकी उम्र मात्र 23 साल की थी|

सुखदेव राजगुरु और भगतसिंह के इस तरह के बलिदान हमें देश के प्रति एक अलग ही भावना को पैदा करते है |

हमें आशा है की आपको हमारे द्वारा दी गयी यह Biography of Sukhdev पसंद आई होगी और अगर आप इससे संतुष्ट है तो इसे अधिक लोगो तक शेयर करे ताकि Biography of Sukhdev सभी को पढ़ने का लाभ मिले और एक सच्चे शहीद को श्रध्धांजलि मिले|

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