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Shatkarma in Hindi (षट्कर्म क्या है और उसके लाभ)

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क्या आप जानते है की षट्कर्म क्या है(what is Shatkarma in Hindi)? हमें ज्ञात है की बहोत से लोगो को षट्कर्म के सन्दर्भ में बहोत ज्ञान नहीं होगा| इसीलिए हम आपके लिए आज के इस लेख में हम आपसे Shatkarma kya hai और उसके लाभ(Benefits) क्या है उस पर आपसे यह लेख शेयर कर रहे है| अगर आपको हमारा यह लेख पसंद तो अन्य लोगो के साथ शेयर अवश्य करे|

षट्कर्म क्या है? (What is Shatkarma in Hindi)

हमारा शरीर सामान्यतया वात, पित्त और कफ़ को मिलाकर बना है| जिसमे वात क्रियात्मक कार्य को नियंत्रित करता है, पित्त हमारे शरीर के सभी रासायनिक कार्यों को नियंत्रित करता है, और कफ़ शरीर का संरचना प्रबंधक माना जाता है| एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए यह तीनो को संतुलित रहना जरूरी है| हमारे आसपास का वातावरण और हमारी कई क्रिया इसमे जो संतुलन होता है उसे बिगाड़ सकते है| संतुलामं बिगड़ने से स्वस्थ्य सम्बंधित परेशानी हो सकती है|

प्राणायाम और आसन का उच्च अभ्यास करने हेतु पुराने समय में शरीर स्वस्थ्य करने के लिए छः प्रकार की क्रिया की जाती थी| जिसे योगी शरीर को आंतरिक रूप से भी शुद्ध कर सकता था| इन छः प्रकार की क्रिया को षट्कर्म(षट्क्रिया) कहा जाता है| हठयोग प्रदीपिका में इसे क्रिया के रूप से दर्शाया गया है| यह षट्क्रिया कुछ इस प्रकार है|

  1. नैति
  2. धौति
  3. नौलि
  4. बस्ति
  5. कपालभाति
  6. त्राटक

यह सभी क्रिया शरीर के भिन्न भिन्न भागो के साथ जुडी हुई होती है| इनके करने से शरीर सम्पूर्ण रूप से आतंरिक तौर पर शुद्ध हो जाता है| अब हम आपसे सभी के बारे में थोड़ी थोड़ी इनफार्मेशन शेयर करते है जिसे समजने में आसानी हो|

नैति क्रिया

jal neti kriya |  jal neti karma
Jal Neti Kriya

इस क्रिया का मुख्य हेतु नासिका मार्ग को शुद्ध करना है| इसे करने से अशुद्ध और अपूर्ण रूप से खुल रहे नासिका द्वार पूर्ण रूप से खुलने लगेगे| जिससे साँस की अनियमितता दूर होती है| इसी लिए इसे नासिका को शुद्ध करने वाला व्यायाम भी कहा जाता है| इसे करने के लिए विविध तकनीक का उपयोग होता है, जो निचे दी गयी है|

  • पानी
  • रस्सी,
  • दुग्ध,
  • घी

मांसपेशियों को आराम देने में यह क्रिया शैली अत्यधिक लाभदायक है| इससे चहरे की मांसपेशी में रक्त का अच्छे से वहां होता है और चेहरा चमकदार दिखता है| यह चिंता और अवसाद से मुक्ति देने में समर्थ है| यह नर्वस सिस्टम को भी नियंत्रित करता है|

जल नेति (Water Neti Kriya)

पानी से होने वाली नेति क्रिया के लिए शुद्ध लेकिन नमकयुक्त पानी का प्रयोग किया जाता है| यह पानी को “नेति पॉट” के माध्यम से एक नासिका में डाला जाता है और दूसरी नासिका से बहार निकाला जाता है|बाद में यही क्रिया दुसरे नासिका में भी की जाती है| दोनों नासिका में यह क्रिया कर के जोर जोर से साँस को बहार निकाल ने की क्रिया की जाती है| नेति पॉट ग्लास, सिरेमिक या मेटल का बना होता है|

सूत्र नेति (Thread/Sutra Neti)

सूत्र नेति में एक गीली स्ट्रींग या पतली सर्जिकल ट्यूब उपयोग में ली जाती है| इसे धीरे से नासिका द्वार से डाली जाती है और बाद में मुख द्वार से निकाली जाती है| बाद में उसे आगे पीछे कर के नासिका को साफ़ किया जाता है| इसे करने के लिए एक अच्छी प्रक्टिस और सही गाइडेंस होना आवश्यक है|

धौति नेति

धौति क्रिया आंत की सफाई के लिए की जाती है|

धौति एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है “शुद्धिकरण”| मूल शब्द “धू” इसे लिया गया है जिसका अर्थ है “धोना।” धोती क्रिया विशेष रूप से ऊपरी आंत की सफाई के लिए की जाती है। इस क्रिया में, आंतरिक अंगों से विषाक्त और अपचित भोजन कणों को बाहर निकालने के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है।

धौति नेति में वस्त्र, वामन और दंड धौति काफी प्रचलित है|इस पर अधिक पढने के हमारा धौति पर का विशेष लेख पढ़िए|

नौलि क्रिया (Nauli Shatkarma in Hindi)

नौली को कठिन व्यायाम माना जाता है, जिसे दृढ़ता और धैर्य के साथ ही सीखा जा सकता है। जो उदर स्नायु को मजबूत करता है| पेट और उसके आंतरिक अंगों की शुद्धि और टोनिंग के लिए नौली एक आवश्यक क्रिया है। यह एक स्व-प्रशासित पेट की मालिश है, जिसमें केवल पेट की दीवार की मांसपेशियों का उपयोग किया जाता है। इसे करने के लिए घुटनों पर हाथ रखकर 45डिग्री पर खड़ा रहना होता है| बाद में पेट की मांसपेशी को घुमाया जाता है|

इसे अधिक जानने के लिए हमारा नौलि क्रिया पर का लेख पढ़े|

बस्ति क्रिया (Basti Shatkriya in Hindi)

पेट के तिन हिस्सों का विभाजन करे तो सबसे निचले हिस्से को शुद्ध करने के लिए यह क्रिया की जाती है| बस्ति क्रिया के माध्यम से बड़ी आंत को शुद्ध किया जाता है जो भोजन को जमा कर उससे पानी को निकालती है| इस प्रक्रिया से बड़ी आंत को शुद्ध करना होता है| एक लम्बे अभ्यास के बाद ऐसा समय आएगा की आंत स्वयं हो पानी को सोख सकेंगी| लेकिन उसके लिए एक लम्बे अभ्यास की आवश्यकता है|

बस्ति को अधिक समजने के लिए हमारा लेख पढ़े|

त्राटक (Tratak shatKriya)

 Tratak Shatkarma in Hindi
Tratak Shatkarma in Hindi

त्राटक क्रिया का आँख से सम्बन्ध है| इससे आँख की दृष्टि अच्छी और फोकस बढ़ता है| यह मेंटल डेडीकेशन में उपयोगी है| इसे शुरुआत में कैंडल लाइट से शुरू करना चाहिए| आँख और मोमबत्ती की लॉ के बिच 2 मीटर के आसपास की दुरी होनी चाहिए|

कपालभाति क्रिया

कपाल भाति क्रिया को अच्छे से समजने के लिए हमारा इसपर का विशेष लेख पढ़े जिसके सन्दर्भ में हमने विस्तृत में जानकारी प्रदान की है|

Benefits of Shatkarma – षट्कर्म/षट्क्रिया के लाभ

षट्कर्म/षट्क्रिया के कई लाभ है इसमे से हम यहाँ कुछ दे रहे है बाकी के आप हमारे इस पर के विशेष लेख में पढ़ सकोगे|

  • यह शरीर को आतंरिक रूप से शुद्ध करने में मदद करता है|
  • यह शरीर में वात, कफ़ और पित्त के बिच का संतुलन करता है| जिसे रोगों से दुरी रहती है|
  • इससे शरीर का रासायनिक धातक संतुलन में रहते है जिसे एक सकारात्मक उर्जा का अनुभव होता है|
  • इससे मस्तिष्क को भी स्वास्थ्य रखने में काफी मदद मिलेगी|
  • ध्यान केंद्र करने में इससे सरलता रहेगी| नकारात्मक उर्जा से मुक्ति एवम मष्तिष्क तेज बनेगा|
  • इसकी प्रत्येक क्रिया से शरीर में किसी न किसी विशेष स्थान पर अच्छे शुभ फल मिलेंगे|
  • बस्ति से मल को बहार निकालने में मदद मिलेगी और पेट सम्बंधित परेशानी दूर की जा सकती है|
  • षट्कर्म के माध्यम से नासिका भी शुद्ध की जाती है| जिससे हवा को भरपूर मात्रा में ग्रहण किया जा सकता है|
  • माइग्रेन के दर्दी को भी नेति क्रिया काफी लाभ देती है|
  • त्राटक क्रिया से आँख का तेज बढ़ता है और यादाश्त भी बढती है|

हमें आशा है की आपको हमारे द्वारा दिया गया यह लेख Shatkarma in Hindi और Shatkarma ke labh का यह लेख पसंद आया होगा| अगर आपको इसमे अच्छी जानकारी प्राप्त हुई हो तो इसे अधिक से अधिक लोगो के साथ शेयर करे|

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