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Hindi Short Story

सरस्वती पूजा – Hindi short story for with Moral for kids

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saraswarti pooja hindi story with moral

Be Expensive Reader… आज के इस लेख में हम आपको सरस्वती पूजा जो की एक hindi short story है जो की बच्चो(Kids/Children) में संस्कार का सिंचन करने के लिए काफी उपयोगी है| इस hindi short story के माध्यम से हम आपको 32 अलग अलग लेख के रूप hindi story देंगे|

यह सभी 32 hindi story for kids with moral बच्चो में संस्कार का सिंचन करने के लिए है, इसमे दी गयी हर एक कहानी kids में एक नए संस्कार को बनाए| आज के इस लेख में हम आपको सरस्वती पूजा हिंदी कहानी (hindi story of saraswati pooja) बताएँगे जिसे आप बच्चो को सुनाकर उनमे अच्छे संस्कार का सिंचन कर सकते है|

सरस्वती पूजा – hindi short story

यह कहानी शुरू होती है 1954 के वर्ष वसंत पंचमी के दिन| भारत के एक प्रख्यात वैज्ञानिक डॉक्टर मेघनाद सहा कोलकाता में रहते थे| कोलकाता के स्कूल के कुछ बच्चे और युवा डॉक्टर मेघनाद सहा के आवास पर पहुंचे| डॉक्टर मेघनाद सहा के पास सरस्वती पूजा के लिए फण्ड(निधि) की मांग की|

बच्चे : “डॉक्टर साब क्या आप हमें सरस्वती पूजा के लिए फण्ड(निधि) देंगे?”

डॉक्टर मेघनाद सहा : “क्या आप मुझे यह बतला सकते है की आप सरस्वती की पूजा किस तरह से करने वाले है?”

बच्चो को डॉक्टर के पास से यह प्रश्न सुन के थोडा आश्चर्य हुआ| बच्चे मन में ही यह सोचने लगे की क्या ” इन्हें इतना भी पता नहीं की सरस्वती की पूजा किस तरह होती है!!” कुछ बच्चे ये भी सोचने लगे की “जो लोग वैज्ञानिक हते है और विज्ञान को मानते है और भगवान में नहीं मानते, कभी मंदिर भी नहीं जाते होंगे इस लिए उन्हें नहीं पता होता ही सरस्वती की पूजा कैसे होती है|”

एक युवा: डॉक्टर साहब, “इस साल हम ज्ञान की देवी सरस्वती की की मूर्ति पिछले साल से भी बड़ी लाये है| एक ब्राह्मण को बुलाकर इसे वैदिक मंत्रो के द्वारा पूजा की जायेगी| पूजा पूर्ण होने के बाद सभी लोग प्रसाद लेंगे और शाम को मनोरंजन के हेतु गायक कलाकारों भी बुलाया जाएगा|”

डॉक्टर मेघनाद सहा: “ओहो ! इस तरीके से सरस्वती मा की पूजा होती है यह तो मुझे पता ही नहीं| में भी हर साल माँ सरस्वती की पूजा करता हु लेकिन कभी इस तरह से नहीं की| आपने मुझे इस तरह की नयी रित दी इस इस लिए आप सब का आभार|

डॉक्टर से इस तरह के जवाब की युवा और बच्चो को अपेक्षा नहीं थी| एक बच्चे ने आश्चर्य के साथ पूछा की “डॉक्टर साहब आप किस तरह से माँ सरस्वती की पूजा करते है ?”

डॉक्टर मेघनाद सहा : अगर आप यह जानना चाहते है की में किस तरह से माँ सरस्वती की पूजा करता हु तो आपको मेरे साथ मेरे घर के दुसरे फ्लोर पर आना पड़ेंगा जहा में अपनी रित बता सकता हूँ | इस तरह से वे सभी बच्चो को लेकर दुसरे फ्लोर पर गए|

दुसरे फ्लोर पर पहुचते ही सभी बच्चे आश्चर्य से एक दुसरे के सामने देखते रह गए| दुसरे फ्लोर का पूरा रूम पुस्तकों से भरा हुआ था जहा पर English, Hindi, French, जर्मन , संस्कृत जैसी भाषा में काफी बड़ी संख्या में पुस्तक रखे थे| ये सभी पुस्तके ज्ञान-विज्ञान, धर्म, इतिहास, समाज के विकास में उपयोगी कई पुस्तके थी|

रूम के बीचोबीच एक मेज पर मा सरस्वती की प्रतिमा थी और उसके सामने एक पेन्सिल, पेन और कागज़ था|

अब सभी युवा को डॉक्टर मेघनाद सहा ने प्रतिमा के सामने देखते हुए कहा की ” ज्ञान प्राप्ति और विज्ञान से कुछ ऐसी चीजे आविष्कार करना जिसे मानव जाती का कल्याण हो सके यही मेरी सरस्वती पूजा है|

मेघनाद साह सत्य में सरस्वती के सच्चे भक्त थे और उनकी मृत्यु भी 16 फरवरी, 1956 के दिन जब वसंतपंचमी और सरस्वती पूजा का दिन था तब हुई थी|

Moral of the story

जब जीवन में कुछ मानव समाज को उपयोगी हो सके ऐसे कार्य करने की प्रेरणा मिले यह सही मायने में सरस्वती पूजा है| जब भी शिक्षा प्राप्त करने के बाद वही शिक्षा खुद के अलावा दूसरो की मदद में आये इसे ही सरस्वती की पूजा माननी चाहिए|

हमें आशा है की आपको यह “सरस्वती Hindi short story with moral for kids” पसंद आई होगी| अगर आपको भी इस कहानी से कुछ और सिख प्राप्त हुई है तो हमें कमेंट कर अवश्य बताये| यह Hindi short story को आप अन्य लोगो के साथ भी शेयर करे ताकि उनको भी सरस्वती पूजा का सही मतलब समज आये|

32 hindi story for kids with moral के सभी लेख पूर्ण होने पर हम आपको PDF के रूप में सभी hindi short story को देगे जिसे आप डाउनलोड कर सकते है|

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