कहानी रोहन की जो हमेशा कहता था की “पसंद नहीं”

“पसंद नहीं”

यह कहानी रोहन की है| जो एक छोटे से गाव कनकपुर में रहता था| पढ़ने में काफी होशियार था और अच्छे परिवार से भी था| पढ़ने में होशियार होने के कारण वह दशमी क्लास में अच्छे मार्क्स से पास हुआ था|

रोहन की बड़ी इच्छा के कारण दशवी क्लास के बाद उसके माता-पिता ने उसको बड़े शहर के अच्छे स्कूल में पढ़ने के लिए एडमिशन करवा दिया| और साथ ही एक अच्छे हॉस्टल में भी उसे रहने की व्यवस्था कर दी| थोड़े दिन में रोहन वापिस घर आ गया| परिवार के सभी लोग व्यथित थे और उसे पूछ रहे थे की क्यों वह वापिस आ गया|

रोहन हर प्रश्न का सिर्फ एक ही उत्तर देता था ” मुझे पसंद नहीं, मुझें हॉस्टल नहीं जाना

परिवार के सभी लोग चिंतित थे क्योंकि बहोत से पैसे एडमिशन के लिए और हॉस्टल के लिए दिए गए थे| वह हर व्यक्ति के प्रश्न एवम दलील को सिर्फ एक ही बात कह कर उत्तर देता था की “पसंद नहीं, मुझे नहीं जाना

फिर थक हार कर परिवार ने तय किया और रोहन का सभी सामान बाँध कर उसे घर ले गए| उसे कुछ समय घर रहने दिया और बाद में वह बहारी दुनिया से परिचित हो इस लिए उसे उसके पिता ने एक मित्र की कंपनी में काम के लिए भेजा|

कुछ समय बाद रोहन फिर से वापिस घर आ गया| सभी ने फिर से उसे पूछा की तूम अपने काम पर क्यों नहीं जा रहे| वो हर प्रश्न का सिर्फ एक ही उत्तर देता था| वो कहता था की ” मुझें पसंद नहीं, मुझे नहीं जाना“|

बहोत से लोहग और उसके परिवार ने उसे बहोत समजाया| लेकिन वह समजने के लिए तैयार ही नहीं था| वह सिर्फ एक ही जवाब दे रहा था| उसकी इस हरकत की वजह से उसके घर के सभी लोग परेशां हो गए थे|

इसकी यह बात एक दिन उसके स्कूल के प्रिंसिपल ने सुनी| वह रोहन को जानते थे की वह पढ़ने में काफी होंशियार था और हमेशा ही अच्छे मार्क्स से पास भी होता था| एक दिन उन्होंने रोहन को अपने पास बुलाया|

प्रिंसीपल ने रोहन से पूछा “रोहन, तुम क्यों स्कूल नहीं जाते हो?”

रोहन ने जवाब दिया “मुझे पसंद नहीं, मुझे नहीं जाना!!!”

फिर प्रिसिपल ने रोहन से कहा “कल तुम्हारे पापा मिले थे, और वे कह रहे थे की अब तुम भी उन्हें नहीं पसंद| अब उसे घर से निकाल कर बहार भेज देना है उसे जो चाहे वह कर सकता है| लेकिन अब वह उन्हें पसंद नहीं है|”

रोहन ने कहा ” में कहा जाऊ क्या करू? मुझे मेरे माता पिता नहीं रखेंगे तो कोन रखेगा|

प्रिंसीपल ने कहा ” अब वह तुम्हे सोचना है, तुम्हे जहा पसंद हो वहा चले जाना पर अब वे तुम्हे पसंद नहीं करते| इसीलिए वे तुम्हे नहीं रखना चाहते|”

रोहन ने कहा ” ऐसे थोड़ी होता है| उन्हें पसंद न हो तो उन्हें चलाना पड़ेगा| लेकिन में कैसे बहार चला जाऊ|

प्रिंसिपल ने कहा ” रोहन, यही बात तुम्हे भी सिखनि चाहिए| तुम्हे भी कही न कही तो कुछ करना पड़ेगा| हर बार मुझे पसंद नहीं कह कर अपनी मुश्केली से भाग जाना यह तो कोई उपाय नहीं है| कुछ चीजे पसंद ना हो तब भी उसे चलानी पड़ती है| जीवन में हर कदम पर मुश्केली आती रहती है| उससे भाग जाना कोई रास्ता नहीं है| बहार पढ़ने और अच्छे भविष्य के लिए कभी कभी गाँव को छोड़ना पड सकता है|

रोहन(नतमस्तक होकर सभी बाते सुन रहा था)

प्रिंसीपल ने कहा ” कभी भी कोई काम नया हो तब शुरुआत में वह तकलीफ देता है और असफलता भी मिल सकती है लेकिन जब जब उससे जुड़ ते जाते है तब वह अपने अनुकूल लगता है| जब नया स्कूटर चलते है तब भी ऐसा ही होता है| बार बार गिरते है लेकिन उसे छोड़ नहीं देते और आखिर में हम उसे चलाना सिख ही जाते है| अंत में जब हम उसे चलाना सिख जाते है तब आनंद आ जाता है| इसीलिए अब तुम तुम्हारे पिता को अब पसंद नहीं हो इसी लिए अब तुम्हे ही कुछ करना पड़ेगा”|

रोहन बात को समज गया और प्रिंसिपल से कहा ” सर में आपकी बात को समज गया और आगे से में कभी भी मेरे माता पिता से यह नहीं कहुगा की मुझे पसंद नहीं है| अगर कुछ चीज ऐसी है जो नहीं पसंद है तो उसे में फिर भी चलाऊंगा लेकिन उनको तकलीफ नहीं दुगा|”

बाद में रोहन ने घर जाकर अपने माता पिता को कहा की ” नए सत्रारंभ से में वही स्कूल और हॉस्टल में जाऊँगा| अगर पसंद नहीं आएगा तब भी में वही पर रहूँगा और अच्छे से पढूगा|”

ऐसे ही रोहन अब पढ़ लिख कर इंजीनियर बन गया और अब वह अच्छी नौकरी भी करने लगा|

निष्कर्ष (Moral of the story)

जीवन में हर कदम पर नयी नयी तकलीफ आएगी|लेकिन पसंद नहीं कहकर उससे मुह मोड़ना या संघर्ष से बचाना कभी भी अच्छा रास्ता नहीं है| कभी कभी परिस्थिति विपरीत होने पर भी टिका रहना पड़ता है|

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