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Hindi Short Story

कांच का टुकड़ा Hindi Short Story with Moral for Kids

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kaach ka tukada hindi short story with moral

यह Hindi Short Story with Moral उन 32 लेख में से एक है जिसकी हम आपको भविष्य में एक BOOK उपलब्ध कराने वाले है| यह सभी स्टोरी हिंदी भाषा में होंगी जों बच्चो में नए संस्कार को स्थपित कराने में आपकी मदद करेंगी|

आज की यह कांच का टुकड़ा Hindi Short Story के द्वारा बच्चो में डर की भावना को ख़त्म करने, सही और गलत की परख के साथ कैसे कार्य कराने चाहिए उसकी समज पैदा करने का प्रयास कर रहे है|

कांच का टुकड़ा Hindi Short Story with Moral for Kids

स्कूल शुरू हुए एक हफ्ता हो गया होगा।

छुट्टी के बाद पहले रविवार का आनंद लेने के लिए स्कूल जाने का दिन था। छात्र गलती से भी देर से नहीं आने के विचार के साथ साइकिल लेकर स्कूल जाते थे। रास्ते में उन्होंने लोगों की भीड़, पुलिस की गाडियो को देखा| स्ट्राइकर दुकानों, कार्यालयों और सड़कों औरपर चिल्ला रहे थे। एक पल के लिए यह छात्रों ने वापस जाने का सोचा, लेकिन आज प्रयोगशाला में प्रयोग था इसलिए छात्रों को स्कूल जाने और साइकिल को आगे बढ़ाने की आवश्यकता महसूस हुई।

स्कूल पहुंचने पर सभी छात्र अवाक् हो गए। उन्होंने अपने जीवन में पहली बार ऐसा माहौल देखा था। प्राचार्य सभी छात्रों को समझा रहे थे कि हड़ताल पर पत्थरबाजी की जा रही है और आपको सावधान रहना होगा कि किसी को चोट न लगे और बिना किसी डर के धीरे-धीरे घर वापस चले याजे। ये सभी बच्चे पढ़ने में बहुत होशियार थे लेकिन वे हड़ताल के तूफान से डर गए और एक कोने में खड़े हो गए।

प्रिंसिपल साहब इन छात्रों के पास गए और उनमें से एक छात्र ने कहा, “साहेब, आज के प्रैक्टिकल के बारे में क्या?”, “क्या स्ट्राइकर्स की वजह से हम प्रैक्टिकल नहीं सीख पायेगे?”

प्रिंसिपल साहेब ने उत्तर दिया “देखो बच्चे तुम सीखने के लिए स्कूल आते हो। आज तुमने एक महत्वपूर्ण सबक सीखा है। आज तुम कक्षा में नहीं गए हो, लेकिन तुमने जीवन का पाठ सीख लिया है। दुनिया मंगल है, दुनिया शुभ है, ईश्वर सृजन है, मनुष्य के हृदय में शुभ भावना है, आपने सुना होगा लेकिन, आज आप देखते हैं कि मानव मन में अशुभ भावनाएं भी होती है| ऐसे जीवन में कई सबक आयेंगे आपको इसमे कोन सही है और कोण गलत है उसे समाज कर ही आगे बढ़ना है| इसे समज कर ही बालक से युवा और युवा से अनुभवी आदमी बनना है|

अन्य सभी छात्र कहने लगे, “सर, अगर हड़ताल और पत्थरबाजी में हमारे साथ कुछ होगा तो नहीं ना, हमें तो आज घर जाने से भी डर लग रहा है”

प्रिंसिपल ने साहसपूर्वक समझाया, “यदि आप एक सच्चे और अच्छे इंसान बनना चाहते हैं, तो कभी भी किसी स्थिति से डरो मत और उस स्थिति की याददाश्त को भुलाने की कोशिश भी मत करो। लगातार बिना किसी भेदभाव के देखें कि हड़ताल के पीछे कौन है और कौन अन्याय कर रहा है।” यह भी देखें कि कौन अन्याय सह रहा है।

आपको अच्छे और बुरे की मिश्रित दुनिया में रहना होगा। आप उन सज्जनों को भी पाएंगे जो आपको प्रगति के पथ पर ले जाते हैं और आपको दुनिया में विनाश के रास्ते पर ले जाने वाले दुष्ट भी मिलेंगे। आपको अच्छे और साहसी व्याख्यान और अच्छे संस्कार देने वाले भी मिलेंगे और वे भी जो बकवास और बुरी बातें करते हैं वो भी मिलेंगे। आपको स्वयं इसे पहचानना है की कोन सही है और कोन गलत|

प्रिंसिपल ने बच्चों को आगे बताया कि, “आज अपने अनुभवों के बारे में सोचना, एक हिंसक वृत्ति का पोषण करने से करने हिंसक वृत्ति की आदत पैदा होती है। ऐसे तूफान में भी, मन को शांत रखने से संयम होता है। यह मुस्कुराहट जो आपके चेहरे पर जब आप एक हफ्ते से के लिए स्कूल आ रहे थे तो एक खिलते हुए कमल की तरह सुंदर और आकर्षक थी। मुस्कुराहट को आज भी वापस लाओ। आपका दिन बर्बाद नहीं हुआ है।

जैसे-जैसे प्रिंसिपल बच्चों को इस तरह समझा रहे थे की अचानक दूर-दूर से आ रहे पुरुषों की भीड़ की आवाज सुनाई देने लगी। चीख कानों से टकराई। छात्र थोड़ा घबरा गए और उसी समय एक पत्थर इस तरफ आ गया और खिड़की के शीशे से टकराया। पत्थर ने शीशे को कई टुकड़ों में तोड़ दिया। प्रिंसिपल ने भीड़ को देखा और भीड़ ने बच्चों को देखा।

बच्चों को देखकर भीड़ का गुस्से को शांत हुआ और आगे कोई नुकसान नहीं पहुँचाया। प्रिंसिपल ने प्रत्येक छात्र से अपने हाथ में कांच का एक टुकड़ा लेने को कहा।

प्रिंसिपल ने कहा, “आज आपने जो कुछ सीखा है, उसकी याद जीवन में एक महत्वपूर्ण सबक है।” कांच का यह टुकड़ा हिंसा के खिलाफ लाचारी का प्रतीक है। आपके दिल की खिड़कियां आज टूट चुकी हैं। आपके बचपन का कांच टूट गया है, और आप परिपक्व हैं। ” यह टुकड़ा विनाश को दर्शाता है कि निर्माण को यह निर्णय आपको लेना है। आपने आज तक अलग अलग रंग के शीशे देखे होगे, लेकिन यदि आप कांच के इस टुकड़े को ध्यान से देखते हैं तो आपको अशुभ मानसिकता का रंग दिखाई देगा। यदि आप इस पाठ को याद करते हैं। मुझे यकीन है कि भविष्य में आपके द्वारा ऐसा नहीं होगा।

 जाओ …. कांच के इस टुकड़े को अपने पास बचा कर रखे ताकि तुम लगातार याद रख सको कि कल कोई तुम्हारे द्वारा इस तरह का टुकड़ा न हो|

Moral of the story

इस दुनिया में सभी तरह के लोगो से भविष्यमें आपकी मुलाकात होंगी| इन सभी में से कोन सही है और कोन गलत है इसके बारे में सोचना और समजना काफी आवश्यक है| अगर हम खुद यह नहीं सोच सकेंगे की कोन सही है और कोन गलत है तो भविष्य में कोइ हमें अपने खराब स्वार्थ के लिए प्रेरित कर गलत राह पर ले जा सकता है|

हमें आशा है की आपको और आपके बच्चो को हमारी यह कहानी पसंद आयी होगी| अगर आपको हमारी यह कहानी कांच का टुकड़ा Hindi Short Story with Moral पसंद आयी हो तो इसे अधिक से अधिक शेयर करे ताकि अन्य लोगो के साथ इसे पहुचाया जा सके|

अगर आपको इस कहानी से कोई विशेष सिख प्राप्त हुई है तो आप हमें अवश्य निचे कमेंट कर के बता सकते है| हमें आपके प्रतिभाव के प्रतीक्षा है| धन्यवाद|

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