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What is CRR and SLR in Hindi |Difference |full form in Hindi

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CRR and SLR in Hindi

अर्थव्यवस्था में बैंक पर नियंत्रण होना काफी आवश्यक है| भारत में सभी बैंक पर नियंत्रण रखने का काम भारतीय रिज़र्व बैंक का है| रिज़र्व बैंक के द्वारा बैंक पर नियंत्रण के लिए कई तरह के अलग अलग कदम उठाये जाते है और पालिसी बनायी जाती है| CRR और SLR उसी में से एक है| आज के इस लेख के माध्यम से हम आपको CRR क्या है? (What is CRR in Hindi) और SLR क्या है ? (what is SLR in Hindi) उसके सन्दर्भ में इनफार्मेशन देंगे| साथ ही CRR और SLR के बिच अंतर और क्यों इसे बढ़ाया और घटाया जाता है उस पर भी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे|

सबसे पहले what is CRR in Hindi को समजते है|

What is CRR in Hindi (CRR क्या है)

CRR का अर्थ होता है “Cash Reserve Ratio” अर्थात हिंदी में इसे “नकदी आरक्षित अनुपात” कहा जाता है| रिज़र्व बैंक के द्वारा हर बैंक के पास से एक निश्चित प्रतिशत में रकम अपने पास रखी जाती है जिसे CRR कहा जाता है| जिस पर बैंक को किसी भी प्रकार का ब्याज़ नहीं मिलता| अभी CRR 3% है जो भविष्य में बढ़ाई या कम की जा सकती है|

किसी भी बैंक को CRR के अंतर्गत कितनी कीमत रिज़र्व बैंक में जमा की जायेगी उसे तय करने के लिए NDTL का सहारा लिया जाता है| NDTL(Net Demand and Time Liabilities) जो की बैंक के पास कितना फण्ड और ऋण है उस पर से तय होता है| हर बैंक को उसके अपने NDTL के 3% को RBI(Reserve Bank of India) के पास जमा करना होता है|

यह 4% अभी की तय राशी है जिसे RBI के द्वारा कभी भी बदल दिया जा सकता है| रिज़र्व बैंक के द्वारा CRR से बैंक के पर और बैंक से अर्थतंत्र में पैसे पर नियंत्रण रखती है| महंगाई और ग्रोथ को नियंत्रित करने के लिये यह काफी आवश्यक है| यह सिर्फ कॅश या कॅश जैसे किसी रूप में बैंक में जमा करना होता है|

CRR को एक Example से समजे

एक बैंक ABC के पास लोगो के द्वारा सेविंग अकाउंट, करंट अकाउंट और FD जैसे विविध माध्यम से 1,00,00,000 रूपये (हकीकत में इससे कई गुणा अधिक होती है) की NDTL है| तो उस बैंक ABC को उसका 4% RBI में जमा करना होता है| बैंक ABC उसको लोन के रूप में किसी को नहीं दे सकती और RBI के द्वारा उसे ब्याज भी नहीं मिलता|

What is SLR in Hindi (SLR क्या है)

SLR का अर्थ है “Statutory Liquidity Ratio” अर्थात हिंदी में इसे “सांविधिक सम्पत्ति अनुपात” कहा जाता है| यह रिज़र्व बैंक के द्वारा अन्य बैंक पर लगाईं जाने वाली सीमा(बंधन) है| SLR को RBI के द्वारा तय किया जाता है|सभी बैंक को अपने NDTL में से SLR जीतनी राशी वह कॅश, गोल्ड रिज़र्व और गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में निवेश करनी होती है| जिससे बैंक में आनेवाले आकस्मिक संकट(crisis) को आसानी से निकाला जा सके|

अभी रिज़र्व बैंक के द्वारा तय SLR 18% है| मतलब की किसी भी को अपने NDTL की 18% राशि को कॅश, गोल्ड रिज़र्व और गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में निवेश करनी होती है| इस राशी को वह लोन पर नहीं दे सकते है| इस राशी पर बैंक को इंटरेस्ट(ब्याज) मीलेगा|

SLR को एक Example से समजे

ABC बैंक के पास 1,00,00,000 रूपये (हकीकत में इससे कई गुणा अधिक होती है) की NDTL है| उसमे से इस बैंक को 18% कॅश, गोल्ड और गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में निवेश करना होता है| जिसमे उसको ब्याज मिल सकता है| लेकिन इसे बैंक के द्वारा किसी को लोन पर नहीं दिया जा सकता|

What is Difference Between CRR and SLR in Hindi | CRR और SLR के बिच का अंतर

CRR और SLR को अच्छे से समजने के लिए उसके बिच के अंतर (Difference) को समजन चाहिए|

CRR (Cash Reserve Ratio in Hindi)SLR (Statutory Liquidity Ratio in Hindi)
CRR के आधार पर जो भी तय राशी रिज़र्व बैंक में रखीं जाती है उस राशी पर रिज़र्व बैंक के द्वारा किसी भी प्रकार का ब्याज़ नहीं दिया जाता|SLR के रूप में बैंक कही पर भी अपने पैसे निवेश या बैंक में सेविंग में रख सकती है| जैसे की कमर्शियल बैंक, और रिज़र्व बैंक जिस पर उसे ब्याज मिलता है|
इसके द्वारा रिज़र्व बैंक अन्य बैंक में तरलता(Liquidity) को नियंत्रित करती है|SLR के द्वारा RBI बैंक के द्वारा दी जाने वाली लोन पर नियंत्रण रखा जाता है|
बैंक के द्वारा CRR को रिज़र्व बैंक में नकद के रूप में जमा कराना होता है|SLR को बैंक के द्वारा कॅश के रूप में, गोल्ड के रूप में, या गवर्नमेंट सिक्योरिटीज के रूप में रखा जाता है|

CRR और SLR क्यों जरूरी है? (Why CRR and SLR are important?)

अर्थतंत्र में स्थिरता, महंगाई पर नियंत्रण और विकास के लिए CRR और SLR काफी आवश्यक है| इसके माध्यम से RBI के द्वारा बांको में तरलता लायी जाती है और एक सेफ्टी वातवरण बनाया जाता है|अभी बैंक RBI को 3% CRR के रूप में देती है और 18% SLR में निवेश करती है| मतलब अभी बैंक के पास सिर्फ 79% ही राशी है जिसे वह लोन के रूप में अपने ग्राहक को दे सकती है|

CRR और SLR का एक और सबसे महत्वपूर्ण उपयोग है की इससे मुद्रास्फीति(Inflation) और ग्रोथ नियंत्रित करना| जब भी किसी बैंक के पास लोन देने के लिए अधिक राशी होगी तो वह कम ब्याज पर ग्राहक को लोन दे सकती है| उस स्थिति में लोगो के पास पैसे आयेगे और ग्रोथ भी बढ़ेगी साथ महंगाई भी बढ़ेगी|

अब महंगाई पर नियंत्रण लाने के लिए CRR और SLR के रेट बढाने से बैंक के पास लोन देने की रकम कम हो जायेगी| क्योंकि उसे अधितकतर राशी CRR और SLR में लगानी पड़ेगी| ऐसे में बैंक अपना मुनाफा बढानें के लिए या संतुलित करने के लिए ब्याज भी बढ़ाएगा| जिससे लोग के द्वारा लोन भी कम ली जायेगी और पैसे की कम मुद्रास्फीति भी कम होगी|

FAQ for CRR and SLR in Hindi

Q. fullform of CRR in Hindi
ANS.
fullform of CRR is “Cash Reserve Ratio” और “नकदी आरक्षित अनुपात

Q. fullform of SLR in Hindi
ANS. fullform of SLR is “Statutory Liquidity Ratio” हिंदी में “सांविधिक सम्पत्ति अनुपात

Q. CRR और SLR को कौन तय करता है?
ANS. इसे भारत में रिज़र्व बैंक के द्वारा तय किया जाता है जिससे मुद्रास्फीति(Inflation) और ग्रोथ पर नियंत्रण जा सके|

Q. क्या CRR और SLR की कीमत बदली जा सकती है?
ANS. हां बिलकुल, CRR और SLR की कीमत बदली जा सकती है| इसे RBI अपनी मोनेटरी पालिसी के द्वारा हर कुछ महीनो में बदलती है|

Q. अभी CRR और SLR की कीमत कितने प्रतिशत(%) है|
ANS. अभी की स्थिति (17 जुलाई 2020) पर CRR 3% है| जब की SLR 18% है|

Q. अगर कोई भी बैंक CRR और SLR को मेन्टेन नहीं करती तब?
ANS. पिछले दो हप्ते के पहले के शुक्रवार के दिन के NDTL के अनुसार बैंक को अपने CRR और SLR को मेंटेन करना होता है| अगर कोई भी बैंक इसको एक दिन भी अगर चुक ये तो बैंक ब्याज के साथ 3% और इंटरेस्ट के साथ पैसे भरने पड़ते है| दुसरे दिन भी भरपाई न करने पर प्रतिदिन 5% से इंटरेस्ट बढ़ता है|

निष्कर्ष

यहाँ पर हमने आपसे CRR क्या है? (What is CRR in Hindi) और SLR क्या है? (what is SLR in Hindi) पर इनफार्मेशन शेयर की है| अगर आपको हमारे द्वारा What is CRR and SLR in Hindi पर दी गयी यह इनफार्मेशन पसंद आये तो अधिक से अधिक लोगो के शेयर करे| आगे के लिख में हम आपसे ऐसे महत्वपूर्ण जानकारी शेयर करते रहेंगे|

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  1. Pingback: NDTL in Banking in Hindi | Full-Form | ODTL - Be Expensive

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