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“माँ ” मतलब घर का चलता फिरता मंदिर

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Hello…Be Expensive Reader…. आज का यह लेख हम माँ/माता/mother/mom विषय पर ला रहे है|| माता पर लिखना मतलब माता के प्रेम और वात्सल्य को व्याख्यायित करना जो की काफी मुश्किल है| हमें आशा है की आपको हमारा यह लेख पसंद आएगा| हम अपने जन्म दाता के ऋण को कभी नहीं चूका सकते जैसे की पिता का ऋण, माता का ऋण| यह लेख में अपनी मा को समर्पित करता हु|

यह लेख आपको इस आधुनिक और टेक्नोलॉजी के युगमें माँ के वास्तविक स्वरुप को पहचानने में मदद करेंगा| इस लेख में हमने माता के सम्बंधित कुछ छोटी-छोटी स्टोरी, कुछ मशहूर लोगो के अपने विचार और हमारे विचार दिए| जिसकी अनुक्रमणिका कुछ इस तरह है|

माँ सबसे बड़ी रक्षक

बालक अपने पालना में जुलता है तब उसे अच्छे गीत, सौर्य और वीररस की गाथा सूना कर स्वप्न देश की शेयर कराती है| वह अपने बालक को एक नाजुक पुष्प की तरह ख्याल रखती है| बालक आपने छोटे छोटे कदम से जब जिंदगी की नयी शुरुआत करता है तब माँ एक मात्र ऐसी व्यक्ति है जो हर कदम पर उसकी चिंता करती है|

आज हम सिर्फ “mother day” एक ही दिन माँ के सन्मान में मनाते है लेकिन सही मायने में वह हमारे जीवन के प्रत्येक क्षण से जुडी हुई है जो आने वाले जन्म में भी हम नहीं भूल सकते|

हमने कई बार बिल्ली को अपने बच्चे को ले जाते हुए देखा होगा| वह अपने बच्चे को मुह से उठा कर एक जगह से दूसरी जगह ले जाती है| बिल्ली ने उसे मुह से पकड़ा हुआ है लेकिन फिर भी बच्चे को कभी नुकशान नहीं होता| और वह सलामत स्थान पर ले जाती है|

माँ के बारे में अमिताभ बच्चन के विचार

माँ शब्द नहीं पर शब्दतीर्थ है|

माँ शब्द नहीं पर शब्दतीर्थ है| माता और मृगतृष्णा जल्द से समज में नहीं आते| मृगतृष्णा नहीं होने के बावजूद सामने दिखते है जब की, मा सामने होती है, हमारे सबसे करीब होती है फिर भी उसे पहचानने में गलती होती है| यहाँ पहचानने शब्द का अर्थ है उसे समजना है, उसकी भावनाओं को समजना, वह क्या करती है क्यूँ करती है उस सब को समजना|

अकसर हम उसे सही से नहीं समज पाने पर कुछ ऐसा व्यवहार कर देते है जो अनुचित है लेकिन वह माँ है वह आपके अनुचित व्यवहार को भी समजती है,और माफ़ कर देती है|

एक माको सही से समजने पर और उससे सिखाने पर दुनिया में दुनिया में से युद्ध, प्रदुषण, रोग और तनाव सब दूर हो सकता है, बाद में यह दुनिया सिर्फ प्रेम से चलेगी नहीं की क्रूरतापूर्वक|

एक प्रसिद्ध साहित्य कार के द्वारा यह कहा गया है की भगवान् के दश अवतार में से मात्र दो ही अवतार सही मायने में सार्थक है , जिन्होंने माँ का वात्सल्य और प्रेम प्राप्त किया है|

मोरारी बापू के माँ पर विचार

मा अपने बालक के लिए कुछ भी कर सकती है जान भी दे सकती है|

जन्म देने के बाद माने कई सारी तकलीफों का हसते हुए सामना किया है और हमारे पर अनगिनत उपकार किये है| ऐसा कहा जाता है की वो गिले में सो कर भी बालक के लिए सही व्यवस्था करती है| माने बालक को सिर्फ जन्म ही नहीं किन्तु अपार स्नेह भी दिया है|

ऐसा कहा जाता है की भगवान सभी जगह नहीं पहुच सकते इसीलिए उन्होने माँ का सर्जन किया है| एक माँ अपने बालक के लिए जिव भी डे सकती है उसके सन्दर्भ में एक बहुत प्रचलित कहानी है|

ब्रिटन की महारानी विक्टोरिया की पौत्री एलिस, जिसे एक पांच साल का पुत्र था| वह किसी गंभीर बिमारी से ग्रस्त हुआ जो की एक चेपी रोग था| रोग संपर्क में आनेवाले व्यक्ति में आसानी से फेलता था और जान लेने में सक्षम था| एलिस को पुत्र से मिलने के लिये मनाई कर दी गयी| एलिस बहार से ही अपने पुत्र को देखती थी| एक बार पुत्र ने माता एलिस के सामने देख कर “मा”शब्द कहा और माँ-पुत्र का प्रेम एलिस को मिलने से नहीं रोक पाया| एलिस भी उस रोग से संक्रमित हुई | एलिस ने अंतिम बार अपने पुत्र को मिलने के लिए अपनी जान दे दी|

True story of real mother

माँ हमेशा ही अपने संतान के बारे में सोचती है|

एक परदेशी व्यापारी अपनी दो घोड़ी लेकर उसे बेचने को निकला था| वह चलते चलते एक गाव में एक धनी व्यक्ति के पास पंहुचा दोनों घोड़ीआं बताते हुए पूछा की क्या आप पहचान सकते है की इसमे से कोन माँ है ?

गाव का धनी व्यक्ति एक पल के लिए सोचता रह गया और बाद में उसने अपने नोकर को बुलाया| धनी व्यक्ति ने नोकर को चने लाने को कहा| चने पहली घोड़ी को दिया उसने नहीं खाए बाद में दूसरी को दिया उसने सभी खालिए| बाद में धनी व्यक्ति ने परदेशी व्यापारी से पुचा अब भी मुझे जवाब देने की आवश्यकता है?

अगर प्राणी में भी इतनी समज होती है की वह अपने बच्चे को भूखे रखकर कभी नहीं खाती तो सोच सकते है की हमारी मा हमारी मा हमारे विषय में कितना सोच कर आगे बढटी होगी|

Quotes on mother माँ

माँ के स्वरुप में कोई भी खामी नहीं होती

माँ के जीवन में तिन प्रवाह होते है, रक्त प्रवाह, दूध प्रवाह, और अश्रु प्रवाह| माँ की एक आँख में से क्षमा तो दूसरी आँख में करुणा होती है| माँ के दूध में ही इतनी शक्ति है की बालक को रामकथा, गीता या उपनिषद का अध्ययन करने की आवश्यकता नहीं होती|

थॉमस अल्वा एडिसन को कोन नहीं जानता| उनको बचपन में ही स्कूल से निकालने पर उनकी माँ ने पढाया और उस काबिल बनाया की आज भी दुनिया के सबसे अधिक खोज करने वाले व्यक्ति में उनका नाम शामिल है|

एक वृद्ध माँ के शब्द:

जब में बूढी हो जाऊ और खाते समय अपने कपडे गंदे करू, जल्दी से अपने आपको तैयार न कर पौ तब तुम धीरज रखना, क्योकि जब तुम बच्चे थे और तुम खाते समय ऐसा करते थे और में तुम्हे तैयार करती थी तब में भी धैर्य रखती थी|
जब में बार बार एक ही बात कहू तब गुस्से में मुझे चुप मतकरा देना…क्योंकि जब तुम बोलना सिख रहे थे तब मेने धैर्य रखा था|
जब कोई टेक्नोलॉजी मुझे समज में नहीं आये तो धीरज रखना क्योंकि जब तुम कुछ सिख रहे थे तब मेंने धेर्य रखा था|

यह माँ पर पहला लेख है आगे एक लेख और भी आएगा हमें आशा है की आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा और अगर पसंद आये तो इसे शेयर अवश्य करे धन्यवाद|

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